देश के विभिन्न राज्यों में अब भी झारखंड के 13 हजार 798 प्रवासी श्रमिकों ने वापसी के लिए सरकार के कंट्रोल रूम पर अपना पंजीकरण कराया है। कोविड-19 कंट्रोल रूम की टीम ने सभी जिला प्रशासन से नामों का सत्यापन कराने के बाद यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। 

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने कंट्रोल रूम और उपायुक्तों को मेडिकल प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए श्रमिकों की वापसी के लिए संबंधित राज्यों से समन्वय करने का निर्देश दिया है। इन दिनों कई राज्यों में संपूर्ण लॉक डाउन लागू होने के कारण वापसी में समस्या आ रही है। 

झारखंड सरकार ने सहायता एप पर वापसी के लिए पंजीकरण बंद करा रखा है। इस कारण विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंडी श्रमिकों ने राज्य कंट्रोल रूम से संपर्क किया और वापसी कराने में मदद मांगी। इनकी सबसे बड़ी समस्या काम बंद होने के कारण आर्थिक तंगी है। आर्थिक गतिविधियां शुरू होने के बावजूद इन श्रमिकों को काम नहीं मिल पा रहा है। काफी संघर्ष करने के बाद ये लोग झारखंड लौटने को विवश हैं। 

सबसे अधिक महाराष्ट्र और तमिलनाडु में फंसे: श्रम विभाग के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक अब भी सबसे अधिक श्रमिक 3671 महाराष्ट्र में फंसे हैं। तमिलनाडु में 2813, दिल्ली में 1781, केरल में फंसे 1148 श्रमिकों ने कंट्रोल रूम से वापसी के लिए मदद मांगी है। 

इसी प्रकार आंध्रप्रदेश में 709, हरियाणा 669, दादर एवं नगर हवेली 468, पुंडुचेरी 445, कर्नाटका 342, दामन दिऊ 253, उत्तर प्रदेश 219, अंडमान निकोबार 203, गुजरात 187, गोवा 153, चंड़ीगढ़ में 121, तेलंगाना 111, हिमाचल प्रदेश 110 एवं अन्य राज्यों में भी श्रमिक फंसे हैं।  

लौटने वाले श्रमिकों का आंकड़ा 8.10 लाख के पार पहुंचा : विभिन्न माध्यम से अब तक राज्य में 8.10 लाख प्रवासी श्रमिक, पर्यटक, छात्र झारखंड लौट चुके हैं। श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार गिरिडीह में 88500, गढ़वा में 87900, पलामू में 81200, हजारीबाग में 76800, गोड्डा में 57600, कोडरमा में 45300 प्रवासी लौट चुके हैं। देवघर, धनबाद, दुमका, लातेहार, लोहरदगा में भी 20-20 हजार से अधिक लोग लौटे हैं। 

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